उत्तर प्रदेश वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर दशाश्वमेध घाट तक.रोपवे से सफर होगा सुहाना, यात्रियों को मिलेगी ट्रैफिक से निजात

उत्तर प्रदेश वाराणसी काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर दशाश्वमेध घाट तक.रोपवे से सफर होगा सुहाना, यात्रियों को मिलेगी ट्रैफिक से निजात

उत्तर प्रदेश वाराणसी संवाददाता खुशरंग हीना

वाराणसी: बाहर से आने वाले तीर्थ यात्रियों को अब बनारस की तंग गलियांपरेशान नहीं करेंगी.खासतौर पर कैंट रेलवे स्टेशन से उतरकर विश्वनाथ मंदिर या दशाश्वमेघ घाट की ओर जाने वाले यात्रियों को भीड़ से जूझना नहीं पड़ेगा. बल्कि यह यात्री चंद मिनटों में उड़ते हुए गंतव्य तक पहुंचेंगे. यह सुविधा यहां रोपवे प्रोजेक्ट से मिलने वाली है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस परियोजना का शिलान्यास करेंगे. 644.49 करोड़ रुपये लागत वाला यह प्रोजेक्ट वाराणसी विकास प्राधिकरण ने तैयार की है.

इस प्रोजेक्ट के तहत वाराणसी कैंट से शुरू होकर काशी विद्यापीठ, रथयात्रा, गिरजाघर होते हुए गोदौलिया चौराहे तक कुल पांच स्टेशन बनाए जाएंगे. प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अभिषेक गोयल के मुताबिक इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के पूरा होने से हर साल बनारस आने वाले लाखों तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को सुविधा होगी. इसके अलावा स्थानीय लोग भी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.

निहार सकेंगे बनारस की संस्कृति

उन्होंने बताया कि इस रोपवे का महत्व इसलिए भी ज्यादा है कि बनारस की पुरानी सड़कें काफी संकरी हैं और भीड़ ज्यादा है. ऐसे में खासतौर पर कैंट रेलवे स्टेशन पर उतरकर विश्वनाथ मंदिर जाने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. वाराणसी विकास प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक इस रोप-वे की सवारी लोगों को काशी दर्शन भी कराएगी. दरअसल लोग भूतल से 50 मीटर की ऊंचाई पर चलने वाली ट्रॉली कार में बैठकर वाराणसी की कला, धर्म और संस्कृति को निहार सकेंगे.

इस तरह के प्रोजेक्ट वाला भारत दुनिया का तीसरा देश

प्राधिकरण वीसी अभिषेक गोयल के मुताबिक यह देश का पहला पब्लिक ट्रांसपोर्ट रोप-वे होगा. उन्होंने बताया कि इससे लोगों को सहुलित मिलने के साथ ही इस शहर में पर्यटन को और बढ़ावा मिल सकेगा. नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट डायरेक्टर अनुराग त्रिपाठी की माने तो इस तरह के प्रोजेक्ट पहले से बोलीविया के लापाज और मेक्सिको में हैं. उन्होंने बताया कि दुनिया में भारत ऐसा तीसरा ऐसा देश होगा जहां रोप वे को पब्लिक ट्रांसपोर्ट के रूप में इस्तेमाल होगा, वहीं देश में वाराणसी को यह गौरव हासिल होगा.

अन्य शहरों में बन सकती है संभावना

उन्होंने बताया कि अभी तो यह पायलट प्रोजेक्ट है. यदि यह प्रोजेक्ट सफल होता है तो देश के अन्य शहरों में भी इस तरह की संभावना पर विचार किया जा सकता है. स्विट्जरलैंड की कंपनी बथोर्लेट और नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक प्राइवेट लिमिटेड मिलकर 3.8 किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगी.

16 मिनट में तय होगी दूरी

अनुराग त्रिपाठी के मुताबिक वाराणसी कैंट से गोदौलिया की 3.8 किलोमीटर की दूरी इस रोप वे के माध्यम से महज 16 मिनट में तय होगी. इस प्राजेक्ट के तहत भूतल से करीब 50 मीटर की ऊंचाई पर दो मिनट के अंतराल में कुल 150 ट्रॉली कार चलेंगी. इनमें से प्रत्येक ट्रॉली कार की क्षमता 10 पैसेंजर की होगी. डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक इस रोपवे के जरिए एक तरफ से हर घंटे कम से कम 3000 यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचाया जा सकेगा.