सताए दलित बोले,कलेक्टर साहब,दबंगों के खिलाफ यदि तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो हमारा मर्डर हो सकता है।

सताए दलित बोले,कलेक्टर साहब,दबंगों के खिलाफ यदि तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो हमारा मर्डर हो सकता है।

मरूधर हिन्द

कठूमर।दिनेश लेखी। दलित शोषण मुक्ति मंच डीएसएमएम के प्रदेश सह संयोजक डॉ.रमेश बैरवा के नेतृत्व में मुंडावर तहसील के गांव सुखमनहेड़ी के दलित बड़ी संख्या में आज जिला कलेक्टर से मिले। ज्ञापन सौंपकर जाति विशेष के दबंगों द्वारा अवरुद्ध किए दलित परिवार के घर और खेतों के रास्ते को अविलंब खुलवाने और मारपीट की धमकी देने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की मांग की। इस अवसर पर पीड़ित दलित परिवार श्रीचंद,हरचंद एवं फूलचंद के परिवारजन,ग्रामीण दलित तथा डीएसएमएम से जुड़े कार्यकर्ता सहित महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रही। सताए दलित जिला कलेक्टर से गुहार लगाते हुए बोले “कलेक्टर साहब,अपराधी किस्म के इन दबंगों के खिलाफ यदि तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो हमारा मर्डर हो सकता है। हमारा परिवार बुरी तरह भयभीत है। हमारे घर और खेतों का रास्ता जाति विशेष के दबंगों ने बंद कर दिया है,जिन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। हम जिल्लत की जिंदगी जी रहे हैं। हमारे बच्चे स्कूल,कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं। उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी ततारपुर पुलिस दबंगों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रही है।” पीड़ितों ने कलेक्टर साहब को वीडियो क्लीपिंग दिखाकर अपने बेहद बुरे हालातों के बारे में बताया। इस पीड़ा को जानकर कलेक्टर साहब ने तुरंत एसडीएम मुंडावर को फोन कर आदेश दिया कि इन दलितों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाए। मामला गंभीर है। झगड़ा हो सकता है। मर्डर भी हो सकता है। एडीएम प्रथम को भी पीड़ितों के हक में त्वरित कार्यवाही के आदेश दिए है। जिला पुलिस अधीक्षक को भी त्वरित आवश्यक कार्यवाही के आदेश दिए हैं।  

समिति के प्रदेश सह संयोजक डॉ रमेश बैरवा ने ज्ञापन में बताया कि अजीब बात है कि देश “आजादी का अमृत महोत्सव” मना रहा है और इधर दलितों के घर और खेतों का रास्ता बंद है। दलित आज भी दासता का जीवन जी रहे हैं। दलित सुरक्षित नहीं है। दलित उत्पीड़न की घटनाएं अलवर में भी दिनोंदिन बढ़ती ही जा रही है। यह तो तब हो रहा है जब देश का संविधान बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों को इज्जत के साथ जीवन जीने का मौलिक अधिकार देता है। यह तो तब हो रहा है जब दलितों के संरक्षण और उत्थान के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण का विशेष कानून और नीतियां भी बनी हुई हैं।
उल्लेख है कि इस प्रकरण में तथ्यात्मक रिपोर्ट के लिए दलित शोषण मुक्ति मंच के प्रदेश सह संयोजक डॉ रमेश बैरवा के नेतृत्व में टीम कुछ दिन पहले गांव सुखमनहेड़ी गई थी। टीम को पीड़ितों ने बताया कि मातौर निवासी लख्खाराम जाट के पुत्र धर्मसिंह, धर्मेंद्र, वीरसिंह, अजय पुत्र धर्मेंद्र तथा सुखमनहेड़ी निवासी पतराम, मानसिंह,विजयसिंह, राजू, सुभाष जाति जाट के दबंगों ने इस दलित परिवार का जीना मुश्किल कर दिया है। इनके घर और खेत के लिए कानूनन तय 12 फिट चौड़ा सरकारी रास्ता गुंडागर्दी से बंद कर दिया। पगडंडी भी नहीं छोड़ी है,जिससे इस दलित परिवार के घर और खेतों का रास्ता बंद है। अपराधी किस्म के ये दबंग इन्हें मारपीट की धमकी दे रहे हैं। दलित परिवार असुरक्षित है। रास्ता रोके जाने से इस परिवार के सरकारी कर्मचारी ड्यूटी पर भी नहीं जा पा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई बाधित हो गई है। हालत बड़े बदतर हैं। यह एक शिक्षित और समृद्ध दलित परिवार है। जाति विशेष के इन दबंगों जिन्हें राजनैतिक संरक्षण प्राप्त है,के हौसले बुलंद होने के कारण दलित परिवार को भय,प्रताड़ना और जिल्लत की जिंदगी जीनी पड़ रही है। इनके गरिमामय जीवन जीने के अधिकार का खुला हनन हो रहा है। जाट जाति के इन दबंगों की असल नियत इस दलित परिवार को प्रताड़ित कर विस्थापित करके जमीन को हथियाने की है,जैसा कि अक्सर अन्य जगहों पर दलितों के साथ भी हो रहा है। दलित परिवार का रास्ता बंद किए जाने से गांव एवं आस पास के दलितों में गहरा आक्रोश है। हिंसा तक की संभावना है।