आपका नाम संस्कृति मिटाने वालो में नहीं संस्कृति बढ़ाने वालों में हो – गुरुदेव*

*आपका नाम संस्कृति मिटाने वालो में नहीं संस्कृति बढ़ाने वालों में हो – गुरुदेव*

*अरुण जोशी कुशलगढ़ की रिपोर्ट*

कुशलगढ़ नगर में परम पूज्य आचार्य श्री वसुनंदी जी महामुनिराज के सुशिष्य पूज्य मुनि श्री 108 शिवानंद जी महाराज एवं प्रशमानंद जी मुनिराज के सानिध्य से धर्ममय वातावरण छाया हुआ है। प्रातः अभिषेक शांतिधारा के पश्चात प्रवचन सभा हुई। जिसके दौरान गुरुदेव को शास्त्र भेंट एवं पाद प्रक्षालन किया गया।
गुरुदेव ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह संसार तो नाट्यशाला है। सभी को अपने किरदार निभाकर चले जाना है। अगर हमें के किरदार को निभाना ही है तो क्यों ना अपना जीवन इतना आदर्शमय बनाएं ,जब हमारा जन्म हुआ था तब सब हंस थे हम रोए थे।लेकिन आगे एक ऐसा इतिहास रच के जाना है कि जब हम जाएं तो संसार रोए । ध्यान रखें किआपका नाम संस्कृति मिटाने वालो में नहीं संस्कृति बढ़ाने वालों में हो।
बाहरी प्रदर्शन को गुरुदेव ने निरर्थक बतलाते हुए कहा अगर भगवान के मंदिर जाओ दूसरों को दिखने नहीं भगवान को देखने जाओ। क्योंकि मंदिर में दूसरों को दिखाने में रहे तो मात्र प्रदर्शन की ही वस्तु बने रहोगे। अगर आप चाहते हो कि लोग आपके दर्शन करें तो दिखने नहीं देखने जाओ ,भगवान को तभी आप दर्शनीय बनोगे। श्रद्धा की स्थिरता हेतु पूज्यश्री ने उपदेश दिया की विपत्ति आने पर अपनी श्रद्धा या अपने भगवान को मत कोसों ।वह विपत्ति भगवान ने नहीं आपके कर्म ने आपको दी है ।अतः अटल श्रद्धावान बनो सही पर श्रद्धा करना सीखो और सच्चे मार्ग पर स्थिर रहो। तभी जीवन सही दिशा में कार्य कर सकेगा।