कितना अच्छा होता यदि देश में सरकारी सेवाओं में जितने स्वीकृत पद हैं उन पर तय समय में नियुक्ति हो जाती:लक्ष्मी सिन्हा

*कितना अच्छा होता यदि देश में सरकारी सेवाओं में जितने स्वीकृत पद हैं उन पर तय समय में नियुक्ति हो जाती:लक्ष्मी सिन्हा*


मरुधर विशेष/संवाददाता शिवकुमार मौर्य


बिहार पटना:-राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के प्रदेश संगठन सचिव महिला प्रकोष्ठ श्रीमती लक्ष्मी सिन्हा ने बातचीत में कहा कि सतर्क व्यवस्था तो वही होगी, जो पद रिक्त होने के पहले ही नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ले। पद चाहे भारत के मुख्य न्यायाधीश का हो, चुनाव आयुक्त का हो या सरकारी स्कूल के अध्यापक का। आज देश के लाखों युवा केंद्र और राज्य सरकारों से यही चाहते हैं। जिस प्रकार से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और विभिन्न एजेंसियों के प्रमुखों के पदों पर तय समय में नियुक्तियां हो जाती है वही तरीका विभिन्न सरकारी सेवाओं में अन्य पदों के संबंध में भी अपनायी जानी चाहिए। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि समय पर नियुक्ति सरकारों की प्राथमिकता में होनी चाहिए। लगता है बेरोजगारी का मुद्दा देश की सरकारों की प्राथमिकता में ही नहीं है। तभी तो वर्षों तक किसी पद पर नियुक्ति या तो लटकी रहती है या जब कभी आरंभ होती है तो खत्म होने का नाम नहीं लेती। रही सही कसर नियुक्ति में भ्रष्टाचार पूरी कर देती है। नौकरी की आस लगाए युवाओं को अंत में निराशा ही हाथ लगती है। कितना अच्छा होता यदि देश में सरकारी सेवाओं में जितने स्वीकृत पद हैं उन पर तय समय में नियुक्ति हो जाती। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि एक व्यक्ति की नियुक्ति कितने ही लोगों पर प्रभाव डालती है। उसके परिवार का जीवन तो सुधरता ही है, अपने काम के माध्यम से वह देश- समाज को भी विकास की राह पर आगे बढ़ाने में योगदान करता है। देश को चुनाव आयोग की तरह एक भर्ती आयोग की जरूरत है। कहीं कोई लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा या विधान परिषद की सीट खाली हुई नहीं की चुनाव आयोग तुरंत उस पर चुनाव करवा कर भरने की कवायद शुरू कर देती है। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि ऐसी ही प्रक्रिया सरकारी विभागों में नौकरियों को लेकर भी अपनाई जानी चाहिए तभी बेरोजगारी की मार सह रहे युवाओं को कुछ राहत मिल सकती है। केवल चुनावों में रोजगार का वादा कर वोट हासिल कर लेने से बेरोजगारी की समस्या का हल नहीं कि जा सकती हैं।